Request All My Of My Friends, Please Read Carefully
एक सामान्य नागरिक का पत्र देश के प्रधानमंत्री के नाम।
मान्यनीय प्रधानमंत्री जी,
इस वर्ष एक बार फिर कई सौ करोड़ रुपए,
भारत के स्वतंत्रता दिवस को मनाने में खर्च किए जायेंगे।
एक विशाल आयोजन होगा और आप तिरंगा फहरा कर समस्त भारतीयों को यह याद दिलायेंगे कि हमारा देश कितना महान है,
और हम सब को अपने भारतीय होने पर कितना गर्व होना चाहिये।
महोदय मैं आप से निवेदन करना चाहता हूँ कि इस आयोजन पर खर्च होने वाले पैसे का कुछ हिस्सा मेरे कर से भी आता है,
और यह पैसा कैसे खर्च हो, यह सुनिश्चित करने में मेरा भी कुछ अधिकार होना चाहिए।
यह वर्ष भारत और भारतीयों के लिए जश्न मनाने का नहीं है।
अपने तीस साल के जीवनकाल में मैं अपने देश कि स्थिति के प्रति इतना निराश कभी नहीं हुआ।
यह वर्ष आँसू बहने और आत्मचिंतन करने का है।
में आप से आग्रह करता हूँ कि इस बार समारोह को सामान्य रखा जाए और इन अरबों रुपयो
को गरीबों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करने में खर्च किया जाए।
मेरे देश के 23 बच्चे, सरकारी जहरीला खाना खा कर मर गए,
और इस जघन्य पाप के लिए हमारे लोकतंत्र में ना तो कोई सांसद जिम्मेदार है,
ना विधायक, और ना मुख्यमंत्री और ना हीं प्रधानमंत्री।
इन पैसों से आप हम हजारों छात्रों को बिना ज़हर का भोजन कई दिन तक खिला सकते है।
इन पैसों से अगर हम चार बहनो को चार दिन भी बलात्कार का शिकार होने से बचा पाये
तो मुझे अपने भारतीय होने का ज़्यादा गर्व होगा।
इन पैसो से अगर हम यह सुनिश्चित कर सकें कि फिर कोई आतंकवादी किसी हिंदुस्तानी सैनिक का सर काटने का अपराध ना कर सके तो यह हमारी उपलब्धि हीं होगी।
इन पैसों की ज़्यादा जरूरत उन लोगों को है जिन्होंने अपना सब कुछ उत्तराखंड की आपदा में खो दिया और फिर नेताओं के संवेदनहीनता का शिकार बने। जरा सोचिये इन बातोँ पर।
एक सामान्य नागरिक का पत्र देश के प्रधानमंत्री के नाम।
मान्यनीय प्रधानमंत्री जी,
इस वर्ष एक बार फिर कई सौ करोड़ रुपए,
भारत के स्वतंत्रता दिवस को मनाने में खर्च किए जायेंगे।
एक विशाल आयोजन होगा और आप तिरंगा फहरा कर समस्त भारतीयों को यह याद दिलायेंगे कि हमारा देश कितना महान है,
और हम सब को अपने भारतीय होने पर कितना गर्व होना चाहिये।
महोदय मैं आप से निवेदन करना चाहता हूँ कि इस आयोजन पर खर्च होने वाले पैसे का कुछ हिस्सा मेरे कर से भी आता है,
और यह पैसा कैसे खर्च हो, यह सुनिश्चित करने में मेरा भी कुछ अधिकार होना चाहिए।
यह वर्ष भारत और भारतीयों के लिए जश्न मनाने का नहीं है।
अपने तीस साल के जीवनकाल में मैं अपने देश कि स्थिति के प्रति इतना निराश कभी नहीं हुआ।
यह वर्ष आँसू बहने और आत्मचिंतन करने का है।
में आप से आग्रह करता हूँ कि इस बार समारोह को सामान्य रखा जाए और इन अरबों रुपयो
को गरीबों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करने में खर्च किया जाए।
मेरे देश के 23 बच्चे, सरकारी जहरीला खाना खा कर मर गए,
और इस जघन्य पाप के लिए हमारे लोकतंत्र में ना तो कोई सांसद जिम्मेदार है,
ना विधायक, और ना मुख्यमंत्री और ना हीं प्रधानमंत्री।
इन पैसों से आप हम हजारों छात्रों को बिना ज़हर का भोजन कई दिन तक खिला सकते है।
इन पैसों से अगर हम चार बहनो को चार दिन भी बलात्कार का शिकार होने से बचा पाये
तो मुझे अपने भारतीय होने का ज़्यादा गर्व होगा।
इन पैसो से अगर हम यह सुनिश्चित कर सकें कि फिर कोई आतंकवादी किसी हिंदुस्तानी सैनिक का सर काटने का अपराध ना कर सके तो यह हमारी उपलब्धि हीं होगी।
इन पैसों की ज़्यादा जरूरत उन लोगों को है जिन्होंने अपना सब कुछ उत्तराखंड की आपदा में खो दिया और फिर नेताओं के संवेदनहीनता का शिकार बने। जरा सोचिये इन बातोँ पर।







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